मध्य प्रदेश में जबलपुर हाईकोर्ट में आज यानी 13 मई से 15 मई तक ओबीसी 27 फीसदी आरक्षण मामले की सुनवाई होगी। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिविजनल बेंच में केस की सुनवाई होगी। सुबह 11।30 बजे से सुनवाई शुरू होगी। ओबीसी आरक्षण से जुड़े 86 मामलों में यह अंतिम सुनवाई होगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह अदालत में सरकार का पक्ष रखेंगे। वहीं ओबीसी आरक्षण के विरोध में दायर याचिकाओं की ओर से अधिवक्ता आदित्य संगी, अंशुमान सिंह और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमन लेखी पक्ष रखेंगे। ओबीसी आरक्षण मामले में अधिवक्ता वरुण ठाकुर और शशांक रतनू याचिकाकर्ताओं की ओर से पक्ष रखेंगे।

इससे पहले ओबीसी आरक्षण मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई की तारीख 28 अप्रैल तय की गई थी। तब सुनवाई टल गई थी। अगली तारीख 13, 14 और 15 मई तय की गई थी।

क्या थी सुनवाई टलने की वजह?

हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण मामले में सुनवाई टलने की मुख्य वजह तकनीकी बताई गई थी। जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट से कुछ महत्वपूर्ण याचिकाएं हाईकोर्ट नहीं पहुंची थीं। इसी का हवाला देते हुए अदालत ने सुनवाई की अगली तारीखें तय कर दी थीं।

अचानक बदल गई लीगल टीम

इस कानूनी लड़ाई के बीच एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला था। सरकार ने इस मामले में नियुक्त अपने दो विशेष वकीलों को पद से हटा दिया था। राज्यपाल द्वारा नियुक्त विशेष अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और एडवोकेट विनायक प्रसाद शाह को ओबीसी आरक्षण मामले में हटा दिया गया था। सरकार ने इन्हें विशेष अधिवक्ता के पद से अलग करने की नई अधिसूचना भी जारी कर दी थी। सरकार के इस फैसले के बाद ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामले में कानूनी रणनीति को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। जारी सुनवाई से विशेष अधिवक्ताओं को हटाने के फैसले को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई थी।

गौरतलब  है कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद ओबीसी आरक्षण की सुनवाई को लेकर और अधिक संवेदनशीलता बढ़ गई है। आरक्षण से जुड़ा यह मामला पहले से ही काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है और विशेष अधिवक्ताओं को हटाए जाने के फैसले ने इसे और भी चर्चित बना दिया है।

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